बुधवार, 4 सितंबर 2019

पहली बार किये रक्तदान का सुखद- :आनंद 


कहते हैं….ज़िन्दगी का आखरी ठिकाना  ईश्वर का घर है…! कुछ अच्छा कर ले मुसाफिर किसी के घर .खाली हाथनहीं जाते ….!!



आज से लगभग 24 वर्ष पहले ये उन दिनों की बात है जब हिमाचल की राजधानी शिमला के संजौली कॉलिज में दाखिला लिए कुछ दिन हुए थे। तो किसी ने मुझे बताया कल रात को बस का बहुत बड़ा एक्सीडेंट हुआ है, जिसमे बहुत सारे लोग मारे गये है और घायलो की संख्या भी बहुत ज्यादा है। कॉलिज की दीवारों पर ब्लड बैंक व मरीज़ के रिश्तेदारों की ओर से रक्तदान करने की अपील के लिए पोस्टर लगे हुए है।
    उस समय रक्तदान के प्रति लोगो में इतनी जाग्रति नहीं थी, न मोबाइल का इतना प्रचालन था। लैंडलाइन फोन होते थे पर बहुत कम वो भी ज्यादातर खराब ही रहते थे है। सोशल मिडिया के बारे में तो किसी ने सोचा भी नही होगा। कभी कुछ ऐसा सिस्टम भी आयेगा जो मानवता के इस महान कार्य की सेवा के लिए बहुत ही कारगर सिद्ध होगा है। उस वक्त रक्तदान की आवश्यकता पर शहर भर में पोस्टर लगा करते थे जिसमे मरीज के लिए रक्तदान करने की अपील की जाती थी। उस वक्त मुझे रक्तदान के विषय में कुछ भी पता नही था की रक्तदान क्या होता है। मानव शरीर से इसे कैसे और कितना निकला जाता है। मुझे उस वक्त मालूम ही नही था की ब्लड के भी कोई ग्रुप होते है। उस वक्त और आज के समय में बहुत अंतर आ गया है। मेरी नन्ही बेटी अभी स्कूल में पहली क्लास में भी नही पहुची पर उसको अपना ब्लड ग्रुप मालूम है। उसके स्कूल में सभी बच्चो के आई कार्ड में उनका ब्लड ग्रुप लाल रंग व् मोटे शब्दों लिखा हुआ  है। जो आने वाले कल के लिए रक्तदान जैसे महान कार्य के लिए शुभ संकेत है। फिर मेरे एक मित्र ने पूछा आपका ब्लड ग्रुप किया है। मेने कहा भाई मुझे नहीं पता मेने तो कभी चेक नहीं करवाया ! उन्होंने कहा हमारे पांच-छ: साथी अस्पताल  जा रहे है। आप भी चलो क्या पता आपका ब्लड ग्रुप किसी मरीज़ से मैच हो जाये। मै भी अपने मित्रों के साथ शिमला के IGMC ब्लड बैंक में गया । उस समय ब्लड बैंक पुरानी बिल्डिंग में हुआ करता था! तो वहां पहले मेरा वजन किया गया फिर हाथ की अंगुली से ब्लड की दो- तीन बूंदे निकली गयी और थोड़ी देर बहार बेठने को बोला गया ! करीब पांच-सात मिनट के बाद मुझे बताया गया आपका ब्लड-ग्रुप O+ve है। आपका ब्लड ग्रुप किसी अर्जुन नाम के मरीज़ के ग्रुप से मैच हो गया ! आप चाहो तो रक्तदान कर सकते हो !
       उस दिन पहली बार किये रक्तदान से एक नौजवान की जब जान बची, मन को शांति और अंतरात्मा को सकुन का अनुभव हुआ और मन में कहीं अन्दर इस बात का एह्साह हुआ की मानव जीवन की रक्षा के लिए रक्तदान का कितना बड़ा महत्व है। मानवता सेवा की इसी भावना के साथ आखरी सांस तक रक्तदान को अपना मिशन बना लिया।
मेरा एक संदेश उन युवाओ के लिए हैं। जो रक्तदान से डरते है। जीन लोगो को लगता है,उनको रक्तदान से कोई कमजोरी आयेगी, उनका शरीर खराब होगा। या जीन लोगो ने अभी तक अपना ब्लड ग्रुप भी चेक नहीं करवाया हैं। मै मानता हूँ पहली बार रक्तदान करने में डर लगना भी स्वाभाविक है। पर एक बार रक्तदान करने के बाद हमें जो प्रसन्नता, निडरता और अपने आप पर गौरव महसूस होता हैं। और जो मन को और अंतरात्मा को शांति और सकुन का अनुभव होता है। उसका आनंद रक्तदान के बिना नही लिया जा सकता है।आप लोगो ने देखा होगा कितने ही अनगिनित लोगो ने रक्तदान शिविरों में और ब्लड बैंक में रक्तदान किया हैं। आजतक रक्तदान करने से कोई नहीं मरा, पर आपके रक्तदान नहीं करने से कोई न कोई मर सकता है। कभी कभी आपके आसपास व हॉस्पिटल में कई बार रक्तदान के शिविर लगते है जिसमे लोगो से आह्वान किया जाता है की अपने रक्त का दान करे, जब भी आपको ऐसी जानकारी मिले, पहले तो अपने मित्रो से अपने घर परिवार या रिश्तेदारों से साँझा करे, अगर आपने ये जानकारी दस लोगो से साँझा की और दस लोगो में से दो लोगो ने भी रक्तदान किया तो आपके लिए तो उसका फल रक्तदान के बराबर ही है। लेकिन अगर आप स्वस्थ है। तो रक्तदान के महायज्ञ में जाइये और तुरंत अपना रक्त किसी अंजान व्यक्ति की सेवा में समर्पित करे। हमारा दिया हुआ रक्त कभी भी बर्बाद नहीं जाता वह किसी न किसी जरूरतमंद के काम जरुर आता है। तो आपको जब भी मौका मिले अपना रक्तदान करे क्योंकि यही एक दान महादान कहा गया है!

 मुझे नही पता के रक्तदान करने से कोई पुण्य मिलता है,कितना नहीं,हमे तो इतना मालूम है रक्तदान से जहाँ एक व्यक्ति का जीवन बचता है वहीँ रक्तदाता का स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहता है ! आज की डेट में मेरा रक्तदान का आंकड़ा भले ही 102 को पार कर गया हो पर मेरा मकसद कोई बड़ा आंकडे की वृद्धि करना नहीं बल्कि अपने राष्ट्र के ज्यादा से ज्यादा लोगो की सेवा करने से है। जिसके लिए मैं ऊपरवाले का बहुत शुक्रर गुजर हूँ जो मुझे असह्य व् जरूरतमंद की सेवा के लिए चुनता रहता है। शुक्रर गुजर हूँ उन सभी लोगो का जिनके स्नेह और आशीर्वाद की प्रेरणा से मानवता के कार्य को करने का जज्बा और शक्ति मिलती है।

कहते हैं -: लालरंग खतरे का सूचक होता है लेकिन आपके लाल रंग का खून किसी की जिंदगी बदल सकता है। किसी की खुशियां आपके हाथ में है रक्तदान करें और खुशियां बांटें और टूटतीसांसो के शिल्पकार बनें !


रक्तदान -: साक्षात_जीवनदान !!❣ 


 ब्लड डोनर नरेश शर्मा

ग्राम पंचायत सरिवन,मझोली तहसील ठियोग ज़िला शिमला (हि.प्र.) पिन 171201


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