#प्लाज़्मा_से_कोरोना_का_अंत :
आज कल एक ख़बर न्यूज़ चैनलो में बड़ी सुर्खियों में चल रही है। #प्लाज्मा_थेरेपी से कोरोना पीड़ित मरीज़ को शीघ्रता से स्वस्थ किया जा सकता है।
तो जानते है। ये #प्लाज़्मा_क्या_होता हैं ....? और ये #कैसे_मिल सकता हैं। इसको कैसे और कहां पर डोनेट करते हैं...? किस व्यक्ति के #शरीर से लिया गया प्लाज़्मा कोरोना संक्रमित मरीज़ को स्वस्थ करता है ...?
#प्लाज़्मा_दो तरह से लिया जा सकता है। #पहली_प्रकिया जब हम स्वेच्छा से ब्लड बैंक में या रक्तदान शिविर में रक्तदान करते हैं तो उस ब्लड के अन्दर हमारे शरीर से 4 प्रकार के कॉम्पोनेन्ट डोनेट होते है।
पहला-:#रेड ब्लड सेल्स -: ये हमारे शरीर के हर हिस्से में ऑक्सीजन पहुचता हैं।
दूसरा-: #व्हाइट ब्लड सेल्स -: हमारे शरीर मे इंफेक्शन या रोगो से लड़ने का कार्य करता हैं।
तीसरा-:#प्लाज्मा -: हमारे ब्लड का वो हिस्सा है जो लिक्विड फॉर्म मे होता है। यही प्लाज्मा अपने अंदर रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स तथा प्लेटलेट को घौल के रूप में शरीर के अंदर प्रवाह करता है। इसी प्लाज़्मा को कोरोना के इलाज के लिए कारगर माना जा रहा है।
चौथा -: #प्लेटलेट -: ये एक तरह से ब्लड का बॉन्डिंग कम्पोनेन्ट है जो सभी कॉम्पोनेन्ट मे बौंड बनाता है ताकि ब्लड का कोई भी कॉम्पोनेन्ट अलग अलग न हो इसको थैलीसीमिया,डेंगू,कैंसर, हार्ट सर्जरी,किड्नी सम्बंधित बीमार मरीजो को चढ़ाया जाता है।
ये सारे #कॉम्पोनेन्ट हमारे एक बार रक्तदान करने से डोनेट हो जाते हैं। जिसे ब्लड बैंक में Conventional Platelet separating machine की सहायता से अलग-अलग किया जाता है। #जरूरत के हिसाब से इसको पेशेंट को चढ़ाया जाता हैं। अगर अधिक सरल भाषा मे बात करें तो जो रक्त हम एक बार स्वेच्छा से ब्लड बैंक या रक्तदान शिविर में दान करते हैं उस ब्लड से #तीन से #चार अलग-2 बीमार लोगो का जीवन बचाया जाता हैं।
#प्लाज़्मा को लेने का #दूसरा तरीका है Advanced Blood Separators Apheresis Machines इस एडवांस तकनीक के द्वारा ब्लड डोनर के शरीर से रक्त का वही भाग लिया जाता हैं। जिसकी मरीज़ को आवश्यकता होती है। अगर किसी मरीज़ को प्लाज़्मा की आवश्यकता है तो केवल प्लाज़्मा ही लिया जाता है। अगर किसी को पलेलेट्स की आवयश्कता हैं तो डोनर के शरीर से केवल प्लेटलेट्स ही लिए जाएंगे बाकी अन्य कॉम्पोनेन्ट ये मशीन डोनर के शरीर मे वापिस चढ़ाती हैं। इस तरह की प्रक्रिया से हम केवल इस मशीन की सहायता से ब्लड बैंक में ही डोनेट के सकते है। जहां पहली तकनीक से एक बार रक्तदान करने के बाद हम फिर से #90_दिन के बाद डोनेशन कर सकते हैं वहीं इस एडवांस तकनीक की सहायता से हम फिर से #7_दिन के बाद डोनेशन कर सकते हैं।
लेकिन दुख की बात हैं हमारे यहाँ #हिमाचल_प्रदेश के किसी भी ब्लड बैंक में ये एडवांस टेक्नोलॉजी की मशीने अभी तक नही लगी है। जिस कारण थैलेसीमिया, केंसर, हार्ट सर्जरी, डिलीवरी व किडनी सम्बंधित कई बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए डोनर को व्होओल ब्लड ही डोनेट करना पड़ता है जिससे डोनर का अभाव और ब्लड बैंक में हर समय की कमी बनी रहती है।
#अब_बात_आती_हैं किस व्यक्ति के शरीर से लिया गया प्लाज़्मा कोरोना संक्रमित व्यक्ति को स्वस्थ किया जा सकता है.......?
#शोधकर्ताओं_के_अनुसार ये प्लाज्मा केवल उसी व्यक्ति के शरीर से लिया जाएगा जो हाली में कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हुआ हो। केवल उसी व्यक्ति का प्लाज्मा कोरोना ग्रसित व्यक्ति को ठीक कर सकता है क्योंकि कोरोना से ठीक हुए व्यक्ति के प्लाज़्मा मे कोरोना से लड़ने की क्षमता अधिक होती है जिसे #एंटीबॉडी कहते हैं और वही एंटीबॉडी युक्त प्लाज्मा अगर कोरोना संक्रमित व्यक्ति को दिया जाए तो उस व्यक्ति का शरीर कोरोना से लड़ने के लिए इम्यूनिटी प्रदान करता है। इस थेरेपी को विज्ञान की भाषा में "कान्वलेसंट प्लाज्मा थेरेपी" कहते हैं!
#अब_कुछ_लोग_सोच_रहे_होंगे_क्या_अब_वैक्सीन_बनाने_की_जरूरत_नहीं_है....?
#वैक्सीन बनना बहुत जरूरी है।क्योंकि एक मनुष्य के प्लाज्मा से केवल 3 से 4 मरीज ही ठीक किये जा सकते हैं! कोरोना से ठीक हुए मरीजो की अपेक्षा हमारे यहाँ बीमार कई गुना अधिक है, एक स्वस्थ मनुष्य से सीमित मात्रा (500-1000ml लगभग) में ही प्लाज्मा निकाला जा सकता है जो डोनर के #फिटनेस पर भी निर्भर करता है।
#विनम्र_निवेदन -: रक्तदान साइंस पर आधारित पूर्णतः #सुरक्षित_प्रकिया हैं। जिसको करने से किसी के घर के #चिराग को बुझने से बचाया जा सकता है। इसलिये रक्तदान करें किसी के जीवन के #शिल्पकार बनें।
जय हिन्द !! जय रक्तदाता !!🇮🇳
✍️Rgds..Blood donor nk 🙏
आज कल एक ख़बर न्यूज़ चैनलो में बड़ी सुर्खियों में चल रही है। #प्लाज्मा_थेरेपी से कोरोना पीड़ित मरीज़ को शीघ्रता से स्वस्थ किया जा सकता है।
तो जानते है। ये #प्लाज़्मा_क्या_होता हैं ....? और ये #कैसे_मिल सकता हैं। इसको कैसे और कहां पर डोनेट करते हैं...? किस व्यक्ति के #शरीर से लिया गया प्लाज़्मा कोरोना संक्रमित मरीज़ को स्वस्थ करता है ...?
#प्लाज़्मा_दो तरह से लिया जा सकता है। #पहली_प्रकिया जब हम स्वेच्छा से ब्लड बैंक में या रक्तदान शिविर में रक्तदान करते हैं तो उस ब्लड के अन्दर हमारे शरीर से 4 प्रकार के कॉम्पोनेन्ट डोनेट होते है।
पहला-:#रेड ब्लड सेल्स -: ये हमारे शरीर के हर हिस्से में ऑक्सीजन पहुचता हैं।
दूसरा-: #व्हाइट ब्लड सेल्स -: हमारे शरीर मे इंफेक्शन या रोगो से लड़ने का कार्य करता हैं।
तीसरा-:#प्लाज्मा -: हमारे ब्लड का वो हिस्सा है जो लिक्विड फॉर्म मे होता है। यही प्लाज्मा अपने अंदर रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स तथा प्लेटलेट को घौल के रूप में शरीर के अंदर प्रवाह करता है। इसी प्लाज़्मा को कोरोना के इलाज के लिए कारगर माना जा रहा है।
चौथा -: #प्लेटलेट -: ये एक तरह से ब्लड का बॉन्डिंग कम्पोनेन्ट है जो सभी कॉम्पोनेन्ट मे बौंड बनाता है ताकि ब्लड का कोई भी कॉम्पोनेन्ट अलग अलग न हो इसको थैलीसीमिया,डेंगू,कैंसर, हार्ट सर्जरी,किड्नी सम्बंधित बीमार मरीजो को चढ़ाया जाता है।
ये सारे #कॉम्पोनेन्ट हमारे एक बार रक्तदान करने से डोनेट हो जाते हैं। जिसे ब्लड बैंक में Conventional Platelet separating machine की सहायता से अलग-अलग किया जाता है। #जरूरत के हिसाब से इसको पेशेंट को चढ़ाया जाता हैं। अगर अधिक सरल भाषा मे बात करें तो जो रक्त हम एक बार स्वेच्छा से ब्लड बैंक या रक्तदान शिविर में दान करते हैं उस ब्लड से #तीन से #चार अलग-2 बीमार लोगो का जीवन बचाया जाता हैं।
#प्लाज़्मा को लेने का #दूसरा तरीका है Advanced Blood Separators Apheresis Machines इस एडवांस तकनीक के द्वारा ब्लड डोनर के शरीर से रक्त का वही भाग लिया जाता हैं। जिसकी मरीज़ को आवश्यकता होती है। अगर किसी मरीज़ को प्लाज़्मा की आवश्यकता है तो केवल प्लाज़्मा ही लिया जाता है। अगर किसी को पलेलेट्स की आवयश्कता हैं तो डोनर के शरीर से केवल प्लेटलेट्स ही लिए जाएंगे बाकी अन्य कॉम्पोनेन्ट ये मशीन डोनर के शरीर मे वापिस चढ़ाती हैं। इस तरह की प्रक्रिया से हम केवल इस मशीन की सहायता से ब्लड बैंक में ही डोनेट के सकते है। जहां पहली तकनीक से एक बार रक्तदान करने के बाद हम फिर से #90_दिन के बाद डोनेशन कर सकते हैं वहीं इस एडवांस तकनीक की सहायता से हम फिर से #7_दिन के बाद डोनेशन कर सकते हैं।
लेकिन दुख की बात हैं हमारे यहाँ #हिमाचल_प्रदेश के किसी भी ब्लड बैंक में ये एडवांस टेक्नोलॉजी की मशीने अभी तक नही लगी है। जिस कारण थैलेसीमिया, केंसर, हार्ट सर्जरी, डिलीवरी व किडनी सम्बंधित कई बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए डोनर को व्होओल ब्लड ही डोनेट करना पड़ता है जिससे डोनर का अभाव और ब्लड बैंक में हर समय की कमी बनी रहती है।
#अब_बात_आती_हैं किस व्यक्ति के शरीर से लिया गया प्लाज़्मा कोरोना संक्रमित व्यक्ति को स्वस्थ किया जा सकता है.......?
#शोधकर्ताओं_के_अनुसार ये प्लाज्मा केवल उसी व्यक्ति के शरीर से लिया जाएगा जो हाली में कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हुआ हो। केवल उसी व्यक्ति का प्लाज्मा कोरोना ग्रसित व्यक्ति को ठीक कर सकता है क्योंकि कोरोना से ठीक हुए व्यक्ति के प्लाज़्मा मे कोरोना से लड़ने की क्षमता अधिक होती है जिसे #एंटीबॉडी कहते हैं और वही एंटीबॉडी युक्त प्लाज्मा अगर कोरोना संक्रमित व्यक्ति को दिया जाए तो उस व्यक्ति का शरीर कोरोना से लड़ने के लिए इम्यूनिटी प्रदान करता है। इस थेरेपी को विज्ञान की भाषा में "कान्वलेसंट प्लाज्मा थेरेपी" कहते हैं!
#अब_कुछ_लोग_सोच_रहे_होंगे_क्या_अब_वैक्सीन_बनाने_की_जरूरत_नहीं_है....?
#वैक्सीन बनना बहुत जरूरी है।क्योंकि एक मनुष्य के प्लाज्मा से केवल 3 से 4 मरीज ही ठीक किये जा सकते हैं! कोरोना से ठीक हुए मरीजो की अपेक्षा हमारे यहाँ बीमार कई गुना अधिक है, एक स्वस्थ मनुष्य से सीमित मात्रा (500-1000ml लगभग) में ही प्लाज्मा निकाला जा सकता है जो डोनर के #फिटनेस पर भी निर्भर करता है।
#विनम्र_निवेदन -: रक्तदान साइंस पर आधारित पूर्णतः #सुरक्षित_प्रकिया हैं। जिसको करने से किसी के घर के #चिराग को बुझने से बचाया जा सकता है। इसलिये रक्तदान करें किसी के जीवन के #शिल्पकार बनें।
जय हिन्द !! जय रक्तदाता !!🇮🇳
✍️Rgds..Blood donor nk 🙏

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