सोमवार, 15 जून 2020

हिमाचली रक्तवीर के नाम से विख्यात नरेश शर्मा #99 बार कर चुके है -: "रक्तदान"

कहते हैं….ज़िन्दगी का आखरी ठिकाना  ईश्वर का घर है…! कुछ अच्छा कर ले मुसाफिर ,किसी के घर खाली हाथनहीं जाते ….!!



रक्तदान मानव के द्वारा किया गया सबसे बडा दान है, रक्तदान करके हम घायल और जरूरतमंदो की मदद कर उनका जीवन बचा सकते है। कहा जाता है कि ईश्वर ने रक्तदाताओं को इस धरती पर अपने प्रतिनिधि के रूप में भेजा है। जिससे घायल एवं जरूरतमंद लोग मदद के लिए ईश्वर के साथ रक्तदाताओ की भी मदद ले सके। जिससे उनका जीवन सुरक्षित हो सकें।

ऐसी की एक कहानी हिमाचली रक्तवीर के नाम से विख्यात #99 बार रक्तदान कर चुके जिला शिमला की तहसील ठियोग की ग्राम पंचायत सरिवन के मझोली गाँव के नरेश शर्मा जिन्होंने देश के कई राज्य के हस्पतालो में और रक्तदान शिविरों में रक्तदान कर मानवता और इंसानियत की मिसाल ही पेश नही की है बल्कि युवाओ को रक्तदान के महान कार्य के लिए प्रेरित भी करते है।
जब कभी भी किसी को रक्त और प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ती है तो सेंकडो किलोमीटर दूर हिमाचल से बहार दुसरे राज्य में भी खून देने पहुंच जाते हैं। देश के कई राज्य के हस्पतालो में और रक्तदान शिविरों में रक्तदान कर चुके नरेश शर्मा के पास वयकायदा कई सारे रक्तदान के प्रमाण पत्र भी है। शर्मा जी ने पहली बार किये रक्तदान का अनुभव भी साँझा किया, ये 24 साल पहले उन दिनों की बात है जब शिमला में कॉलिज में दाखिला लिए कुछ दिन हुए थे। तो किसी ने बताया कल रात बस का एक्सीडेंट हुआ है और कॉलिज की दीवारों पर रक्तदान के लिए पोस्टर लगे है। उस समय रक्तदान के प्रति इतनी जाग्रति नहीं थी, न मोबाइल का इतना प्रचालन था। लैंडलाइन फोन होते थे पर बहुत कम वो भी ज्यादातर खराब ही रहते थे है। सोशल मिडिया के बारे में तो किसी ने सोचा भी नही होगा। उस वक्त रक्तदान की आवश्यकता पर शहर भर में पोस्टर लगा करते थे जिसमे मरीज के लिए रक्तदान करने की अपील की जाती थी। उस वक्त मुझे रक्तदान के विषय में ज्यादा कुछ पता नही था की रक्तदान क्या होता है। मानव शरीर से इसे कैसे और कितना निकला जाता है। मुझे उस वक्त मालूम ही नही था की ब्लड के भी कोई ग्रुप होते है। उस समय और आज के समय में बहुत अंतर आ गया है। मेरी नन्ही बेटी अभी स्कूल में पहली क्लास में भी नहीं पहुची पर उसको अपना ब्लड ग्रुप मालूम है। उसके स्कूल में भी सभी बच्चो के आई कार्ड में उनका ब्लड ग्रुप लाल रंग व् मोटे शब्दों लिखा हुआ है। जो आने वाले कल के लिए रक्तदान जेसे महान कार्य के लिए शुभ संकेत है। फिर मेरे एक मित्र ने पूछा आपका ब्लड ग्रुप किया है। मेने कहा भाई मुझे नहीं पता मेने तो कभी चेक नहीं करवाया ! उन्होंने कहा हमारे पांच-छ: साथी अस्पताल  जा रहे है। आप भी चलो क्या पता आपका ग्रुप किसी मरीज़ से मैच हो जाये। शिमला के IGMC ब्लड बैंक में गये उस समय ब्लड बैंक पुरानी बिल्डिंग में हुआ करता था! तो वहां पहले मेरा वजन किया गया फिर हाथ की अंगूली से ब्लड की एक बूंद निकली गयी और थोड़ी देर बहार बेठने को बोला गया ! करीब पांच- सात मिनट के बाद मुझे बताया गया आपका "ब्लड-ग्रुप O+ve" है।आपका ब्लड ग्रुप किसी अर्जुन नाम के मरीज़ के ग्रुप से मैच हो गया ! आप चाहो तो रक्तदान कर सकते है!
17 साल की उम्र में 24 साल पहले पहली बार रक्तदान कर एक नौजवान की जब जान बची, तो मन में कहीं अन्दर इस बात का एह्साह हुआ की मानव जीवन की रक्षा के लिए रक्तदान का कितना बड़ा महत्व है। मानवता सेवा की इसी भावना के साथ आखरी सांस तक रक्तदान को अपना मिशन बना लिया। आजकल जिला सोलन के परवाणू में निजी व्यवसाय कर रहे है। नरेश शर्मा कहते हैं- यूँ तो दान के अनेक रूप है और किसी भी रूप में किया जा सकता है। दान का मकसद एक ही होता है मानवता और इंसानियत की सेवा। मानवता की ऐसी ही एक सेवा का नाम है रक्तदान, जो न केवल एक व्यक्ति का जीवन बचाता है बल्कि उसके परिवार को अपार खुशियां दे जाता है। रक्तदान से हम समाज के लिए एक बहुत बड़ा काम
तो कर ही रहे होते है साथ में इससे हमारी सेहत भी बेहतर बनी रहती है। आजकल हमारे कई मित्र तो अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए भी रक्तदान करने लगे है। यदि हम नियमित रूप से रक्त का दान करते है। तो हमारे शरीर से हानिकारक तत्व बहार निकल जाते है। जिस से हार्ट अटैक व् कैसंर जैसी खतरनाक बीमारी की संभावनाएं कम हो जाती है और शरीर में नई उर्जा और सफुर्ती का एहसास होता है।

इस कार्य के लिए इनको भारत के कई राज्य की समाजसेवी संस्थाओ के द्वारा समय- समय पर सम्मानित भी किया जा चूका है। अभी 26 नवम्बर 2018 को हरियाणा के जिला करनाल में डायमंड रक्तदाता एवं पर्यावरण प्रहरी व् समाजसेवी डॉ. अशोक कुमार जी के द्वारा भारतीय सेनिको के सम्मान में लगाये गये 200वे रक्तदान शिविर व् रक्तदाता सम्मान समारोह में जीवन का 99वां रक्तदान करने का सोभाग्य मिला, जिसमे नरेश शर्मा जी को अनेक बार रक्तदान करके समाज और राष्ट्र की सेवा करने के लिए गोल्ड मेडल और राष्ट सेवा पुरुस्कार की उपाधि से सम्मानित किया गया।


इस जीवनरक्षक कार्य के लिए सबसे उपयोगी सोशल मिडिया का माध्यम मानते है। जिसमे बहुत से युवा मित्र हमेशा असहायों व् जरूरतमंद लोगो की सेवा के लिए दिन रात सक्रिय रूप से रक्त सेवा करते हैं! यहां जरूरत पड़ने वाले मरीज का नाम, ब्लड ग्रुप और अस्पताल का नाम वाट्सएप में भेजा जाता है। इसके बाद ग्रुप के सदस्य अपने मित्र, परिवार, रिश्तेदारों से रक्तदान के लिए आग्रह करते हैं और रक्तदाता अस्पताल में खूनदान करने के साथ - साथ मरीज के परिजनों को भी रक्तदान के महान कार्य के लिए प्रेरित करते है। इस कार्य में ज्यादातार सदस्य युवा है और अपने नौकरी पेशे से जुड़े है लेकिन अपनी निजी जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपने सीमित संसाधनों से समाज और देश की सेवा के लिए अतुलनीय योगदान देते रहते हैं। भारत के किसी भी राज्य में रक्त की आवश्यकता होती हैं तो फेसबुक और व्हाट्सएप्प ग्रुप मित्रो के सहयोग से इसकी पूर्ति की जाती हैं। इस कार्य में बहुत सी बेटियां और बहने भी जुडी हुई है। जिनका कार्य केवल रक्तदान करने तक सीमित नही है बल्कि लोगो को रक्तदान के प्रति प्रेरित व् जागरूक करके विशाल रक्तदान शिविरों का भी भव्य आयोजन करवाती रहती है।

नरेश शर्मा जी ने एक संदेश उन युवाओ के लिए दिया है जो रक्तदान से डरते है। जीन लोगो को लगता है,उनको रक्तदान से कोई कमजोरी आयेगी, उनका शरीर खराब होगा। या जिन लोगो ने अभी तक अपना ब्लड ग्रुप भी चेक नहीं करवाया हैं। मै मानता हूँ पहली बार रक्तदान करने में डर लगना भी स्वाभाविक है। पर एक बार रक्तदान करने के बाद हमें जो प्रसन्नता, निडरता और अपने आप पर गौरव महसूस होता हैं। और जो मन को और अंतरात्मा को शांति और सकुन का अनुभव होता है। उसका आनंद रक्तदान के बिना नही लिया जा सकता है।आप लोगो ने देखा होगा कितने ही अनगिनित लोगो ने रक्तदान शिविरों में और ब्लड बैंक में रक्तदान किया हैं। आजतक रक्तदान करने से कोई नहीं मरा, पर आपके रक्तदान नहीं करने से कोई न कोई अवश्य मर सकता है।

जब भी आपके आसपास व हॉस्पिटल में कई बार रक्तदान के शिविर लगते है जिसमे लोगो से आह्वान किया जाता है की अपने रक्त का दान करे, जब भी आपको ऐसी जानकारी मिले, पहले तो अपने मित्रो से अपने घर परिवार या रिश्तेदारों से साँझा करे, अगर आपने ये जानकारी दस लोगो से साँझा की और दस लोगो में से दो लोगो ने भी रक्तदान किया तो आपके लिए तो उसका फल रक्तदान के बराबर ही है। लेकिन अगर आप
स्वस्थ है। तो रक्तदान के महायज्ञ में जाइये और तुरंत अपना रक्त किसी अंजान व्यक्ति की सेवा में समर्पित करे। हमारा दिया हुआ रक्त कभी भी बर्बाद नहीं जाता वह किसी न किसी जरूरतमंद के काम जरुर आता है। तो आपको जब भी मौका मिले अपना रक्तदान करे क्योंकि यही एक दान महादान कहा गया है

सादर-धन्यवाद  !!


मुझे नही पता के रक्तदान करने से कोई पुण्य मिलता है,या नहीं, आज की डेट में मेरा रक्तदान का आंकड़ा भले ही #99 को पार कर गया हो पर मेरा मकसद कोई बड़ा आंकडे की वृद्धि करना नहीं बल्कि अपने देश अपने राष्ट्र व् अपने समाज के ज्यादा से ज्यादा लोगो की सेवा करने से है। जिसके लिए मैं ऊपरवाले का बहुत शुक्रर गुजर हूँ जो मुझे असह्य व् जरूरतमंद की सेवा के लिए चुनता रहता है। शुक्रर गुजर हूँ उन सभी लोगो का जिनके स्नेह और आशीर्वाद की प्रेरणा से मानवता के कार्य को करने का जज्बा और शक्ति मिलती है।
मैं हूँ इंसान और इंसानियत का मान करता हूँ,किसी की टूटती सांसों में हो फिर से नया जीवन बस यह सोच अक्सर अपना 'लहू'दान करता हूँ !!

                                       रक्तमित्र – नरेश शर्मा 



: चलो आज अपना हुनर आज़माते हैं,
तुम आजमाओ तीर, हम जिगर आज़माते हैं !!


जरुरी नहीं कि सभी को बार्डर पर खून बहाने का मौका मिले... देश की जनता के लिए रक्तदान करना भी देश सेवा ही है!


आप स्वैच्छिक रक्तदान करते हैं तो आप केवल रक्तदानी ही नहीं है 
किसी अनजान परिवार के लिए एक फ़रिश्ता भी हैं।


: किसी मरीज को बचाने के लिए डॉक्टर बनना जरूरी नहीं
आप रक्तदान करके भी किसी का जीवन बचा सकते हैं।




:शायद इस जीवन में किसी को ख़ुशी तो न दे पाऊं पर ज़िन्दगी तो किसी न किसीकी बचा ही लूंगा 



: उत्साही मन और मुस्कुराता हुआ चेहरा यही जीवन का श्रेष्ठ अभिनय है....




पहली बार रक्तदान करने में डर लगना स्वाभाविक है
एक बार रक्तदान करने के बाद आप प्रसन्नतानिडरता व गौरव महसूस करेंगे।



क्या भरोसा है ज़िन्दगी का,इंसान बुलबुला है पानी का,

जी रहे हैं कपड़े बदल-बदल कर,एक दिन एक कपड़े में ले जाएंगे कंधे बदल कर !


तुम मौन बने देखा करते,मैं गंगा बनकर बहता हूँ,तुम लहू लिए रगों में बैठे,मैं वन्देमातरम कहता हूँ


माला जपने वाले हाथों से ज्यादा पवित्र वे हाथ होते हैं जो मानवता की सेवा के लिए उठते हैं!


ना मैं पूजा करता हूँ ना मैं इबादत करता हूँ,बस रक्तदान कर इंसानियत की हिफाजत करता हूँ..


दुनिया में रहने के लिए दो ही जगह अच्छी हैकिसी के दिल’ में या किसी की रगों में.


अधिकांश लोग स्वेच्छा से रक्तदान नहीं करते और ख्वाइश रखते है,जरूरत के समय तुरंत रक्त मिल जाएं !!

रक्तदान करने से आजतक कोई नहीं मरापर आपके रक्तदान नहीं करने से कोई न कोई मर सकता है।


दुनिया में रहने के लिए दो ही जगह अच्छी है,किसी के दिल’ में या किसी की रगों में !!!


घर से निकले तो राह में एक बंदगी मिली ! मेरे लहू से आज किसी को नई जिन्दगी मिली !! 




कहानी जब भी ख़त्म हो तो ऐसी ख़त्म होलोग रोने भी लगे तालियाँ बजाते हुए !!



डरे नहीं... नियमों का पालन करते हुए रक्तदान करेंयह पूर्णतया सुरक्षित प्रक्रिया है।



मेरी फकीरी में भी अमीरी का जो जूनून झलकता है यारो

ये वो खानदानी दौलत है जो सिर्फ खून में मिला करती है...


खून की ब्लैक मेलिंग का मुख्य कारण मरीज के परिजनों द्वारा डर की वजह से रक्तदान नहीं करना है।


: खुशियों के लिए क्यों किसी का इंतज़ारजीवन के शिल्पकार तो आप भी हैं


एक कतरा ही सही मेरे मालिक लेकिन,ऐसी नियत दे कि किसी को प्यासा देखूं तो पानी हो जाऊं।


सोच का फर्क है रक्तदान से कमजोर नहीं बल्कि मजबूत होते हैं।



 अपनों के लिए रक्त देता है वह सिर्फ अपने को बचाता है 
              लेकिन जो औरों के लिए अपने रक्त का दान करता है वह इंसानियत को बचाता है।



दुनिया का एकमात्र धर्मनिरपेक्ष स्थान ब्लड़ बैंक है।


आपके लिए विशेष ऑफर...रक्तदान करें, Flat unlimited wishes पाएं।!
रक्त की जरूरत पर अपने रिश्तेदारों को अवश्य परखें...

तुम मौन बने देखा करते,मैं गंगा बनकर बहता हूँ,तुम लहू लिए रगों में बैठे,मैं वन्देमातरम कहता हूँ !!


आत्मा अजर-अमर है और शरीर नश्वर। #देहदान से मृत्यु के बाद भी शरीर को
मानवता की भलाई के लिए जीवन्त रखा जा सकता है।

स्वर्ग/जन्नत जाने का बहुत ही आसान मार्ग...जीते जी रक्तदान  मरणोपरांत नेत्रदान, अंगदान व् देहदान।

पछतावे से अच्छा अभी रक्तदान कर लो पता नहीं फिर शरीर साथ दे ना दे। 
दान करो,आंखों के मोती,अमर रहेगी जीवन ज्योति।
स्वैच्छिक रक्तदान इस संसार का सबसे आसान और करने योग्य कर्म है।


जरुरी नहीं कि सभी को बार्डर पर खून बहाने का मौका मिले... देश की जनता के लिए रक्तदान करना भी देश सेवा ही है!


मृत्यु भोज की जगह रक्तदान शिविर का आयोजन कर मृत्आत्मा की आत्मा की शांति के लिए रक्तदान द्वारा प्रार्थना की जा सकती है।
जलते हुए दीपक से कई दीपक जलाए जा सकते हैं फिर भी उस दीपक की रोशनी कम नहीं होती,
इसी तरह 
नियमित रक्तदान से रक्त कम नहीं होता।





  स्वैच्छिक रक्तदान को 17वां संस्कार मानकर जीवन के 18वें साल से शुरू करना चाहिए।


स्वैच्छिक रक्तदान में परम परमार्थ तो निःसन्देह है ही पर उससे पहले अपना स्वयं का हित भी है!






















ज़िन्दगी जियो ऐसी के सदा दिलशाद रहे !! मै न रहूँगा तुम न रहोगे फिर भी रहेगी निशानियाँ !!


!! जय हिन्द !! जय हिमाचल !!





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